Skip to main content

प्रेरक कहानियां | Prerak Kahaniya : thagi gai kareena | Hindi Kahaniya | Aparna Majumdar

#prerakkahaniya #bacchokikahani #hindikahaniya

#prerakkahaniya #bacchokikahani #hindikahaniya


प्रेरक कहानियां ठगी गई करीना
Prerak Kahaniya : thagi gai kareena | Hindi Kahaniya | Aparna Majumdar


बैडी सियार बहुत ही धुर्त और मक्कार था. भोले भाले जानवरों को बेवकूफ बनाकर उन्हें ठगना उसका काम था.
एक दिन वह किसी को ठगने के इरादे से बाजार में इधर-उधर घूम रहा था. तभी उसकी नजर करीना बंदरिया पर पड़ी.

करीना ने ढेर सारे काफी मंहगे गहने पहने हुए थी. वह बाजार की ओर जा रही थी.

बैडी ने करीना को रोकते हुए, ‘‘चाची, इतनी जल्दी में कहां जा रही हो?’’ बैडी ने कहा.

‘‘बाजार जा रही हूं.’’ करीना ने कहा.

‘‘आपको नहीं मालूम बाजार में कर्फ्यू लगा हैं.’’

‘‘कर्फ्यू लेकिन मुझे तो बहुत जरूरी सामान लाना है.’’ कहते हुए करीना जाने लगी.

‘‘लेकिन वहां तो लूटपाट मची हुई है. अरे, आपने इतने सारे गहने क्यों पहन रखें. किसी ने लूट लिया तो. ये काफी मंहगे भी है.’’ बैडी ने कहां.


‘‘हां, गहने तो बहुत मंहगे है, लेकिन अब मैं क्या करूं, घर के लिए सामान लाना भी तो बहुत जरूरी है.’’ करीना ने उदास होते हुए कहा.

‘‘इसमें परेशान होने की बात नहीं हैं. आप सारे गहने मुझे उतार कर दे दीजिए. मैं यहीं आपके लौटने का इंतजार करता हूं. आप जल्दी से बाजार जाकर सामान ले आओ.’’ बैडी ने कहां.

‘‘लेकिन, ......’’ करीना कुछ चिंतित होते हुए बोली.

‘‘यदि आपको मुझ पर विश्वास नहीं है तो कोई बात नहीं. मैंने तो सिर्फ आपकी मदद करने के इरादे से कहां था.’’ कहते हुए बैडी जाने का नाटक करते हुए वहां से जाने को हुआ.

‘‘अरे बेटा, तुम तो नाराज हो गए. मैं तो सोच रही थी कि तुम मेरे लिए बेवजह कष्ट उठा रहे हो.’’

‘‘इसमें कष्ट की कोई बात नहीं है. जरूरत पड़ने पर सभी को एक दूसरे की मदद करनी चाहिए.’’ बैडी ने हमदर्दी दिखाते हुए कहा.

‘‘बेटा तुम कितने अच्छे हो. आज के जमाने में तुम भलाई का काम कर रहे हो.’’ कहते हुए करीना गहने उतारने लगी.

सारे गहने उतार कर बैडी को देते हुए करीना बोली, ‘‘तुम यही रूको मैं अभी सामान लेकर आती हूं.’’ कहते हुए करीना वहां से चली गई.

करीना ने बाजार से जल्दी-जल्दी सामान खरीदा और लौट आयी. लेकिन वहां बैडी को न पाकर वह उसे इधर-उधर ढुढ़ने लगी.

करीना ने सोचा शायद यही कहीं आसपास गया होगा, अभी आ जाएगा. वह वहां खड़े होकर बैडी के आने का इंतजार करने लगी.

काफी समय हो गया. जब बैडी वापस नहीं आया तो करीना परेशान हो गयी. उसने वहां आसपास के जानवरों से बैडी के बारे में पूछा.

हरी हिरण ने पूछा, ‘‘तुम उसे क्यों ढुढ़ रही हो?’’

‘‘मैंने उसके पास अपने गहने रखें थे.’’ करीना ने कहा.

‘‘तुमने अपने गहने उस मक्कार को संभाल कर रखने के लिए दिए थे.’’ कालू ने आश्चर्य से पूछा.

‘‘वह मक्कार नहीं है, मुझे लगता है कर्फ्यू की वजह से कहीं उसे कुछ न हो न गया हो.’’ करीना ने कुछ सोचते हुए कहां.

‘‘कर्फ्यू, कहां क्फूर्य लगा है.’’ करीना की बात सुनकर बंटी बंदर ने पूछा.

‘‘तुम्हें नहीं मालूम, बाजार में कर्फ्यू लगा हुआ है. चारों ओर लूटपाट मची हुई हैं. तभी तो मैंने अपने गहने उसे संभालने के लिए दिए थे.’’ करीना ने झिड़कते हुए कहां.

करीना की बात सुनकर वहां खड़े सभी जानवर हंसने लगे. कालू कुत्ते ने पूछा, ‘‘तुम भी बाजार गई थी, वहां कही, लूटपाट और कर्फ्यू देखा क्या?’’

करीना का माथा ठनका. उसके आंखों के सामने बाजार का दृश्य उभर आया. चारों ओर चहलपहल थी. कहीं भी लूटपाट जैसा माहौल नहीं था. जल्दी जल्दी सामान खरीदने के चक्कर में उसने इस बात की ओर ध्यान ही नहीं दिया था.

करीना को खामोश देखकर हरी हिरण ने कहां, ‘‘तुम्हें उस मक्कार ने ठग लिया है.’’

बंटी ने कहां, ‘‘तुम्हें इतने मंहगे गहने पहनकर बाजार आने की जरूरत ही क्या थी. आजकल तो समाचारों में भी दिखाया जा रहा है कि फलां जानवर को फलां जानवर ने बेवकूफ बनाकर ठग लिया हैं.’’

करीना उनसे अब क्या कहती, क्योंकि अपनी बेवकूफी की वजह से वह ठगी जा चुकी थी. वह वहां से चुपचाप चली गयी.



Tag #prerakkahaniya #bacchokikahani #hindikahaniya


इन्हें भी पढ़े:- :-      Status Guru Hindi,   Prerak Kahani,   Business Ideas,    Women Business,   Hindi Crime Story

Popular posts from this blog

Laghu Katha | Milawat | Dr. M.K. Mazumdar | Hindi Short Stories | Motivational Story In Hindi

Laghu Katha | Milawat | Dr. M.K. Mazumdar | Hindi Short Stories | Motivational Story In Hindi Laghu Katha | Milawat | Dr. M.K. Mazumdar | Hindi Short Stories | Motivational Story In Hindi ‘मिलावट’ डाॅ. एम.के. मजूमदार द्वारा लघुकथा संग्रह में से एक है। इनकी लघुकथाएं देश के विभिन्न पत्रिकाओं और पेपर में प्रकाशित हो चुकी है। कल और आज के परिवेश में काफी बदलाव आया है। हो सकता है कुछ लघुकथाएं वर्तमान समय में अटपटी लगे पर अनेक लघुकथाएं आज के सदंर्भ में भी उतनी ही सटीक बैठती हैं जितनी की उस वक्त. लघुकथा के परिवेश और काल को समझने के लिए प्रत्येक लघुकथा के लेखन के वर्ष को भी दर्शाया गया है जिससे पाठक उस काल को ध्यान में रखकर लघुकथा की गहराई को महसूस कर सकें। आप भी इन्हें पढ़े और अपने विचार कमेंट बाॅक्स में जरूर लिखें। मिलावट  (Milawat) मुन्ना कसाई काफी परेशान था। सभी चीज़ों में धड़ल्ले से मिलावट हो रही है। ... पिसी मिर्च में ईटो का चूरा ..... चावलों में कंकड़ ....... धनिया में भूसा, परन्तु गोश्त में कोई सस्ता पर्दाथ की मिलावट नहीं कि जा सकती। गोश्त में केवल दूसरे प्रकार का ही गोश्

Baccho ki Kahani : doguni sja nahi tinguni sja | motivational stories for students

#motivationalstoriesforstudents #bacchokikahani #hindikahaniya Baccho ki Kahani : doguni sja nahi tinguni sja | motivational stories for students Baccho ki Kahani : doguni sja nahi tinguni sja | motivational stories for students| aparna majumdar चंपकवन में वानरों का परिचय सम्मेलन आयोजित किया गया था. इस सम्मेलन में शामिल होने के लिए विभिन्न वनों से वानर आए थे. यहां सभी वानर आपस में एक-दूसरे से मिल रहे थे और उनसे दोस्ती कर रहे थे. वानरों के सम्मेलन में जैकी लोमड़ी भी पहुंचा. वानरों में लोमड़ी को देखकर सभी वानरों को आश्चर्य हुआ. वानरों के अध्यक्ष ने जैकी से पूछा, ‘‘यहां वानरों का सम्मेलन चल रहा है. यहां आप जैसे अन्य जानवरों का कोई काम नहीं है.’’ ‘‘मैं यहां स्वयं अपनी मर्जी से नहीं आया हूं. मुझे तो आपके कुल देवता ने अपना दूत बनाकर भेंजा है.’’ जैकी ने विनर्मता से कहां. ‘‘हमारे कुल देवता ने....?’’ वहां उपस्थित सभी वानरों ने आश्चर्य से पूछा. ‘‘हां, आपके कुल देवता ने मुझे आप लोगों की गरीबी दूर करने के लिए एक-एक करोड़ रूपये देने के लिए भेंजा हैं.’’ जैकी की बातें सुनकर

उचित और ठोस उपाय ढुंढ़ें | new motivational story | prerak kahaniya

उचित और ठोस उपाय ढुंढ़ें | new motivational story | prerak kahaniya उचित और ठोस उपाय ढुंढ़ें | new motivational story | prerak kahaniya | Apeksha Mazumdar ब्लैकी बिल्ली रोज चूहों की बस्ती में आती और वहां से दो-चार चूहे पकड़ कर ले जाती थी। इस तरह चूहों की संख्या दिन प्रति दिन कम होने लगी। चूहों की बस्ती में सभी चूहें बिल्ली की इस हरकत से परेशान थे, क्योंकि आएं दिन किसी न किसी के परिवार का सदस्य उसके हाथों मारा जा रहा था। उनकी समझ में नहीं आ रहा था क्या करे। एक दिन चूहों के सरदार ने चूहों की मीटिंग बुलायी। बस्ती के सारे चूहे एक जगह जमा हो गए।  चूहों के सरदार ने कहा, ‘‘ब्लैकी बिल्ली से हमें मुकाबला करना होगा। नहीं तो एक दिन हम सारे खत्म हो जाएंगे।’’ ‘‘इसके लिए हमें क्या करना होगा?’’ चूहों ने पूछा। ‘‘बिल्ली से हम कैसे मुकाबला कर सकते हैं?’’ एक अन्य चूहे ने कुछ सोचते हुए कहा। ‘‘इसके लिए बिल्ली के गले में घंटी बांधना होगा।’’ चूहों के सरदार ने कहां। ‘‘वही पुराना फार्मूला।’’ किसी चूहे ने कहा। ‘‘फिर वहीं समस्या कि बिल्ली के गले में घंटी बांधेंगा कौन?’’ कई चूहों ने एक