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प्रेरक कहानी : इंसान और गधा | Prerak Kahani | insan aur gadha | Apeksha Mazumdar

प्रेरक कहानी : इंसान और गधा  | Prerak Kahani | insan aur gadha | Apeksha Mazumdar
प्रेरक कहानी : इंसान और गधा  | Prerak Kahani | insan aur gadha

प्रेरक कहानी : इंसान और गधा  | Prerak Kahani | insan aur gadha | Apeksha Mazumdar



बात बहुत पुरानी है। एक गांव में एक व्यक्ति अपने पुत्र के साथ रहता था। व्यक्ति हमेशा लोगों की बातों को सुनता और वैसा ही करता था। इस कारण अक्सर वह हंसी का पात्र बन जाता था।

एक दिन पिता-पुत्र बाजार में गधा खरीदने गए। व्यक्ति ने गधा खरीदा और स्वयं उस पर बैठ गया। उसका पुत्र पैदल ही चलने लगा।

यह देखकर राह चलते लोगों ने कहा, कैसा जालिम पिता हैं। स्वयं तो गधे पर बैठ गया और बेटे को पैदल चला रहा हैं।


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लोगों की बात सुनकर व्यक्ति ने सोचा कि लोग सही कह रहे हैं। व्यक्ति गधे से उतर गया और उसने अपने बेटे को गधे की पीठ पर बैठा दिया।


अभी वह कुछ ही दूर गए थे कि लोगो ने कहा, कैसा पुत्र है, उसे अपने पिता के कष्ट की चिंता नहीं हैं। स्वयं तो गधे की पीठ पर बैठा है और बुढ़ा पिता पैदल चल रहा है।

लोगों की बात सुनकर वह व्यक्ति भी अपने बेटे के साथ गधे की पीठ पर बैठा गया।

कुछ दूर जाने पर लोगों ने फिर टोका, कैसे निर्दयी इंसान हैं, जो बेजुबान जानवर पर सवार हो गए है।

दोनों बाप-बेटे गधे से उतर गए और पैदल चलने लगे। कुछ दूर जाने पर फिर कुछ लोगों ने टोका, कैसे मुर्ख इंसान हैं गधा होते हुए भी पैदल जा रहे हैं।


लोगों की बात सुनकर व्यक्ति परेशान हो गया। उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें।

अपने पिता को परेशान देखकर पुत्र ने कहा, ‘‘आप बेवजह परेशान हो रहे हैं, लोगों का क्या है वह तो कुछ भी कहते रहेगे। आप वही कीजिए जो आपको उचित लगे।’’

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